नहीं। जापान में भी धूल और प्रदूषण होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां सार्वजनिक जगहों की सफाई बेहतरीन तरीके से बनाए रखी जाती है।
जापान के अधिकांश सरकारी स्कूलों में बच्चे रोज अपनी क्लास, गलियारे और कई जगहों पर शौचालय तक खुद साफ करते हैं। इससे जिम्मेदारी बचपन से ही सीखते हैं।
शिंतो और बौद्ध परंपराओं में स्वच्छता को सम्मान और पवित्रता से जोड़ा जाता है। यही सोच रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देती है।
जापान में सार्वजनिक डस्टबिन कम मिलते हैं। लोग अपना कचरा अपने साथ रखते हैं और सही जगह मिलने पर ही फेंकते हैं।
कई लोग सुबह अपने घर या दुकान के बाहर की सड़क भी खुद साफ करते हैं। यह वहां की आम आदत है।
घर, स्कूल, मंदिर और कई रेस्तरां में जूते बाहर उतारना सामान्य बात है। इससे बाहर की धूल अंदर नहीं जाती। t
कई कंपनियां 5S सिस्टम अपनाती हैं, जहां कर्मचारी अपने कार्यस्थल को रोज व्यवस्थित और साफ रखते हैं।
बेहतर कचरा प्रबंधन, मजबूत सफाई व्यवस्था और अच्छी सार्वजनिक सुविधाएं भी जापान की स्वच्छता में बड़ा योगदान देती हैं।
जापान की साफ-सफाई किसी जादू का नतीजा नहीं, बल्कि अच्छी आदतों, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी का परिणाम है।